एक wilful defaulter वह उधारकर्ता होता है जिसके पास लोन चुकाने की क्षमता होती है, लेकिन वह जानबूझकर ऐसा नहीं करता। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह वर्गीकरण उन व्यक्तियों या कंपनियों के लिए होता है जो जानबूझकर अपने लोन की देनदारियों को पूरा नहीं करते। 'Wilful defaulter' के रूप में टैग होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिनमें कानूनी कार्रवाई, भविष्य में उधार लेने पर प्रतिबंध, और क्रेडिट स्कोर को नुकसान शामिल है।
'Wilful Default' की परिभाषा क्या है?
RBI के अनुसार, 'wilful default' वह स्थिति है जब उधारकर्ता के पास लोन चुकाने की क्षमता होती है, लेकिन वह ऐसा नहीं करता। इसमें ऐसी स्थितियाँ शामिल हो सकती हैं जहाँ उधारकर्ता लोन के लिए दिए गए फंड्स का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए करता है, बैंक की जानकारी के बिना गारंटी के रूप में दिए गए संपत्तियों को बेच देता है, या पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद चुकौती में विफल रहता है। यह वर्गीकरण कठोर होता है और उधार देने वाली संस्था द्वारा जानबूझकर इरादे को स्थापित करने के लिए गहन जांच की आवश्यकता होती है।
आपके CIBIL स्कोर पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
'Wilful defaulter' के रूप में टैग होने से आपके CIBIL स्कोर पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जो 300 से 900 के बीच होता है। यह टैग आपके स्कोर को काफी हद तक कम कर सकता है, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार का क्रेडिट प्राप्त करना अत्यंत कठिन हो जाता है, चाहे वह व्यक्तिगत लोन हो, कार लोन हो, या क्रेडिट कार्ड हो। वित्तीय संस्थाएँ उधार देने के जोखिम का आकलन करने के लिए क्रेडिट स्कोर पर काफी निर्भर करती हैं, और कम स्कोर उच्च जोखिम का संकेत देता है।
कौन-कौन सी कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
एक बार 'wilful defaulter' के रूप में टैग होने पर, आपको उधार देने वाले बैंक से कानूनी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसमें Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest (SARFAESI) Act, 2002 के तहत वसूली की प्रक्रिया शुरू करना शामिल हो सकता है। बैंक बकाया राशि की वसूली के लिए मुकदमा भी दायर कर सकता है। इसके अलावा, 'wilful defaulter' सूची अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ साझा की जाती है, जिससे नए क्रेडिट लाइन प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है।
क्या 'Wilful Defaulter' टैग हटाया जा सकता है?
'Wilful defaulter' टैग हटाना एक जटिल प्रक्रिया है और आमतौर पर बकाया राशि के निपटान में शामिल होता है। उधारकर्ता को बैंक की शिकायत निवारण तंत्र के समक्ष मामला प्रस्तुत करना होता है या RBI ओम्बड्समैन से संपर्क करना होता है। यदि उधारकर्ता यह साबित कर सकता है कि डिफॉल्ट जानबूझकर नहीं था, तो टैग पर पुनर्विचार किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए आमतौर पर पर्याप्त सबूत और कानूनी समर्थन की आवश्यकता होती है।
यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है और आपकी स्थिति के लिए विशिष्ट वित्तीय या कानूनी सलाह नहीं है।